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फाल्गुन का गीत

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फाल्गुन का गीत  फागुन का महीना है अभी सब खेलेंगे होली,  रंगों का पर्व है ये चली मस्तानों की टोली । गजब की बात है इसमें कहें अब होली सो होली  मिटा कर भेदभाव को बने हम सब की हमजोली।। राम कृष्ण के वंशज हैं करें कुछ काम उन जैसा, सभी हिन्दू सहोदर हैं जाति का बन्धन फिर कैसा। जगत सिरमौर भारत को रंगें भगवे के रंग जैसा, दशानन कंस जैसों के निकालो सीने में गोली।। प्रीति का रंग भरकर के चलाएं मन की पिचकारी, प्रकृति का ध्यान रख करके सजाएं सुन्दर फुलवारी। देवू की तमन्ना है, कर जोड़ करूं विनती, विदेशी वस्तु सामानों की जला दो घर घर में होली।। A

प्यारा कश्मीर

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मैं आपके सामने कश्मीर से संबंधित है एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूं जिसमें कश्मीर को चारों युगों से जोड़ने का प्रयास किया गया है हो सकता है की मेरी कल्पना में आए हुए विचार गलत हो यदि आप कुछ गलत पाते हैं तो मुझे कमेंट बॉक्स में लिखकर बता सकते हैं मैं आपका बहुत-बहुत आभारी रहूंगा तो लीजिए प्रस्तुत है यह गीत प्यारा कश्मीर मेरी आन चली जाएगी , मेरी जान चली जाएगी , तलवार के संग संग में मेरी म्यान चली जाएगी॥  धरती से स्वर्ग की पहचान चली जाएगी ॥  जाए कश्मीर तो मेरी जान चली जाएगी-----२ इतिहास है शिव जी का, यहां वास है शिव जी का , हैं अमरनाथ बाबा कैलाश है शिव जी का ॥  हिमालय की शिवलिंग वाली खान चली जाएगी जाए कश्मीर तो मेरी जान चली जाएगी-----"1"  ससुराल दशरथ की है, ननिहाल भरत की है,  है भरत भूमि प्यारी श्री रामचरित की है ॥  विश्व सुंदरी केकई की शान चली जाएगी  जाए कश्मीर तो मेरी जान चली जाएगी------"2" कश्मीर कर्ण की है ,जगह मेरे धरन की है , है भरत भूमि सारी यह मेरे वतन की है॥  कुरुक्षेत्र की वह सारी ठान चली जाएगी  जाए कश्मीर तो मेरी जान चली जाएगी-...

सरस्वती वंदना - 1

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माँ शारदे तुम्हे आना होगा                     वीणा मधुरतम बजाना होगा ---2 कमल के आसन आज हो बैठारी माँ  करती हैं आप सदा हंस की सवारी माँ  अब ना चलेगा कोई बहाना होगा   वीणा मधुरतम बजाना होगा ---2 सुर की गंगा आज ऐसी बहा दो माँ  सा-रे- गा-मा के क्रम से परिचय करा दो माँ  अज्ञान का तम मिटाना होगा  वीणा मधुरतम बजाना होगा ---2 जिसपे कृपा करे बने मालामाल माँ  थोड़ी सी नजर हटे बने कंगाल माँ  'देवू ' को दास निज बनाना होगा  वीणा मधुरतम बजाना होगा ---2

सरस्वती वंदना ----8

तर्ज - जिंदगी की राहों में रंजो गम के  मेले हैं हंस वाहिनी माँ हम, द्वार तेरे आए हैं  माता तेरे चरणों में, माता तेरे चरणों में, माता तेरे चरणों में  शीश हम झुकाए हैं  हंस वाहिनी माँ हम, द्वार तेरे आए हैं.......  श्वेत कमल का आसन तुम्हारा है  श्वेत कमल का आसन तुम्हारा है  श्वेत ही वसन माँ तुम्हें अधिक भाए हैं  हंस वाहिनी माँ हम, द्वार तेरे आए हैं.......  वीणा को धारण करके दर्शन दिखा दो माँ  वीणा को धारण करके दर्शन दिखा दो माँ  श्रद्धा सुमन हैं कर में आज हम लाए हैं  हंस वाहिनी माँ हम, द्वार तेरे आए हैं.......  स्वर की एक धार तू मुझको पिला दे माँ  स्वर की एक धार तू मुझको पिला दे माँ  शब्द सारे देवू के हैं नारायण ने गाए हैं  हंस वाहिनी माँ हम, द्वार तेरे आए हैं....... 

सरस्वती वंदना 7

तर्ज - चन्दन सा वदन चंचल चितवन  हे शारदे मां मुझे तार दे माँ, विनती मैं करूं तेरी बार बार  मेरी मैया दुख सब हरले तू आकर मेरे द्वार - द्वार  वीणा कर में धारण करती, हो करती हंस सवारी माँ  है श्वेत कमल आसन तुमरा, सुन ली अरदास हमारी माँ  तेरे दर पे खड़े हैं दीन दुःखी, आँसुओं की बहती धार - धार  हे शारदे मां...... दे ज्ञान प्रकाश सभी को माँ, और कर दे निर्मल सब का मन  सदमार्ग चुनें सब लोग यहां, कर दे पावन सब का मन  ना बैर भाव हो आपस में, हर प्राणी में हो प्यार - प्यार  हे शारदे मां...... मेरे कण्ठ में भर दे स्वर गंगा, भर दे हृदय में प्रेम धार  ना करूं किसी से मैं ईर्ष्या और कर दे मुझको भव से पार  नारायण तेरा दास है माँ, "देवू" की कलम पे जाऊं वार  हे शारदे मां......  

विश्व गुरु भारत

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                      🙏 'विनम्र निवेदन'🙏 आदरणीय पाठक बंधु भगिनी सादर प्रणाम ,  मुझे यह लिखते हुए अत्यंत हर्ष की अनुभूति हो रही है कि आपके समक्ष प्रस्तुत कुछ गीत आज मेरे मन में आए हुए नवीन विचारों, शब्दों और रचनाओं का एक अद्भुत संच है ! मेरा जन्म एक साधारण परिवार में हुआ पिता श्री राजेश्वर प्रसाद जी रेलवे में सरकारी कर्मचारी थे माध्यमिक शिक्षा करने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विद्यार्थी विस्तारक रहकर आगे की शिक्षा प्राप्त की कविता लिखने का शौक मुझे कक्षा आठ से लग गया था तब से अब तक मां सरस्वती की कृपा मुझे तुच्छ प्राणी पर बनी हुई है!  आपको कई गीत फिल्मी गीतों की तर्ज पर मिलेंगे तो कई स्वरचित लय और स्वर के आधार पर लिखे गए हैं ये गीत संगीत प्रेमी सर्वजन के लिए एक मनोरंजन का साधन बनेंगे तो साथ ही जीवन में मनन करने योग्य कुछ गीत भी मिलेंगे अंत में आप समस्त जनों को मैं धन्यवाद देते हुए बताना चाहूंगा कि ये रचनाएँ सरस्वती की कृपा का एक छोटा सा अंश ही हैं इनके अंदर कोई व्याकरण संबंधी त्रुटि हो तो उनके लिए म...

सरस्वती वंदना 6

तर्ज --- आजा तुझको पुकारे मेरे गीत रे  मेरी मैया ओ मेरी मैया  हो आजा तुझको पुकारे तेरा पूत री, मैया पूत री, ओ मेरी मैया  हंस सवारी तू करके मां आजा करके मां आजा  वीणा की प्यारी प्यारी धुन तू सुनाजा, धुन तू सुनाजा  आजा तू आजा जल्दी से आजा, आस न जाए मेरी टूट री  आजा तुझको पुकारे तेरा पूत री ओ मेरी मैया.... ज्ञान की देवी तुम हो कहाती, तुम हो कहाती  अजान का तुम तम को मिटाती, तम को मिटाती  तेरी कृपा से, तेरी कृपा से पाप का घड़ा जाय फूट री  आजा तुझको पुकारे तेरा पूत री ओ मेरी मैया.... इस " देवू " की अधभर है नैया, अधभर है नैया  पार लगा दो आप आकर के मैया, आकर के मैया  मेरे भाग्य तख्ता पलट दो, कण्ठ में भर दो स्वर का घूंट री  आजा तुझको पुकारे तेरा पूत री ओ मेरी मैया....                                            🖋 देवेन्द्र कुमार "देवू"