Posts

Showing posts from February, 2022

राधा की पुकार

              राधा की पुकार आजा रे कृष्ण कन्हैया मधुबन में रास रचैया ।  रोए तेरी महतारी, रोए सारी ये गैया।  परसों का तेरा वादा बढ़कर के हो गया ज्यादा।  आए ना कृष्ण मुरारी ,मर जाए राधा प्यारी।।  वंशीवट पर बंसी बजा ना याद मुझे है आता।  तेरे अलावा मेरी मनमोहन ,मुझको कुछ नहीं भाता।  यमुना का पानी बुलावे ,सावन में झूला झुलावे।  दामा का खेल खिलाना, सब से मिलना मिलाना। आजा तू आजा मेरे गिरधारी।। १।।  यमुना किनारे धेनु चराना ,सुमिरन कर रोते हैं। ग्वाल बाल ना करें कोलाहल , आँसुवन मुख धोते हैं।  माखन का ना है ठिकाना, सुन ले तू मेरे कान्हा।  कालिंदी में गेंद का जाना ,नाग का नाथ नथाना।  'देवू' प्रभु क्यों सुध बिसारी।। २।। 

राम की पुकार

                              राम की पुकार ओ मेरी सीता मेरी मनमीता, कहाँ गई तू जनक दुलारी। मेरी  प्रिय सुन टेर हमारी। -------2 पंचवटी सुनी है तुझ बिन ना रह पाएगी तू मुझ बिन,      लखन पुकारे आजा अब आ रे,दुखी हुए सब बन रखवारे है मन बेचैनी हे मृगनैनी कहां गई तू प्राणन प्यारी।।                      मेरी प्रिय सुन टेर हमारी। ------------ हे पशु-पक्षी तुम ही बता दो कहां गई वह सही पता दो,  विपिन निहारु ,तुम्हें पुकारू ,प्रिये प्रिये कह नजर पसारुँ। हे तन रूपा, दिव्य स्वरूपा, देवू की तू महतारी।।                         मेरी प्रिय सुन टेर हमारी। -----------