राधा की पुकार
राधा की पुकार आजा रे कृष्ण कन्हैया मधुबन में रास रचैया । रोए तेरी महतारी, रोए सारी ये गैया। परसों का तेरा वादा बढ़कर के हो गया ज्यादा। आए ना कृष्ण मुरारी ,मर जाए राधा प्यारी।। वंशीवट पर बंसी बजा ना याद मुझे है आता। तेरे अलावा मेरी मनमोहन ,मुझको कुछ नहीं भाता। यमुना का पानी बुलावे ,सावन में झूला झुलावे। दामा का खेल खिलाना, सब से मिलना मिलाना। आजा तू आजा मेरे गिरधारी।। १।। यमुना किनारे धेनु चराना ,सुमिरन कर रोते हैं। ग्वाल बाल ना करें कोलाहल , आँसुवन मुख धोते हैं। माखन का ना है ठिकाना, सुन ले तू मेरे कान्हा। कालिंदी में गेंद का जाना ,नाग का नाथ नथाना। 'देवू' प्रभु क्यों सुध बिसारी।। २।।