राम की पुकार

                             राम की पुकार

ओ मेरी सीता मेरी मनमीता, कहाँ गई तू जनक दुलारी।मेरी प्रिय सुन टेर हमारी। -------2


पंचवटी सुनी है तुझ बिन ना रह पाएगी तू मुझ बिन,   

लखन पुकारे आजा अब आ रे,दुखी हुए सब बन रखवारे

है मन बेचैनी हे मृगनैनी कहां गई तू प्राणन प्यारी।। 

                    मेरी प्रिय सुन टेर हमारी। ------------


हे पशु-पक्षी तुम ही बता दो कहां गई वह सही पता दो, 

विपिन निहारु ,तुम्हें पुकारू ,प्रिये प्रिये कह नजर पसारुँ।

हे तन रूपा, दिव्य स्वरूपा, देवू की तू महतारी।। 

                       मेरी प्रिय सुन टेर हमारी। -----------








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