फाल्गुन का गीत
फाल्गुन का गीत फागुन का महीना है अभी सब खेलेंगे होली, रंगों का पर्व है ये चली मस्तानों की टोली । गजब की बात है इसमें कहें अब होली सो होली मिटा कर भेदभाव को बने हम सब की हमजोली।। राम कृष्ण के वंशज हैं करें कुछ काम उन जैसा, सभी हिन्दू सहोदर हैं जाति का बन्धन फिर कैसा। जगत सिरमौर भारत को रंगें भगवे के रंग जैसा, दशानन कंस जैसों के निकालो सीने में गोली।। प्रीति का रंग भरकर के चलाएं मन की पिचकारी, प्रकृति का ध्यान रख करके सजाएं सुन्दर फुलवारी। देवू की तमन्ना है, कर जोड़ करूं विनती, विदेशी वस्तु सामानों की जला दो घर घर में होली।। A