सरस्वती वंदना 7
तर्ज - चन्दन सा वदन चंचल चितवन
मेरी मैया दुख सब हरले तू आकर मेरे द्वार - द्वार
वीणा कर में धारण करती, हो करती हंस सवारी माँ
है श्वेत कमल आसन तुमरा, सुन ली अरदास हमारी माँ
तेरे दर पे खड़े हैं दीन दुःखी, आँसुओं की बहती धार - धार
हे शारदे मां......
दे ज्ञान प्रकाश सभी को माँ, और कर दे निर्मल सब का मन
सदमार्ग चुनें सब लोग यहां, कर दे पावन सब का मन
ना बैर भाव हो आपस में, हर प्राणी में हो प्यार - प्यार
हे शारदे मां......
मेरे कण्ठ में भर दे स्वर गंगा, भर दे हृदय में प्रेम धार
ना करूं किसी से मैं ईर्ष्या और कर दे मुझको भव से पार
नारायण तेरा दास है माँ, "देवू" की कलम पे जाऊं वार
हे शारदे मां......
Comments
Post a Comment