फाल्गुन का गीत
फाल्गुन का गीत
रंगों का पर्व है ये चली मस्तानों की टोली ।
गजब की बात है इसमें कहें अब होली सो होली
मिटा कर भेदभाव को बने हम सब की हमजोली।।
राम कृष्ण के वंशज हैं करें कुछ काम उन जैसा,
सभी हिन्दू सहोदर हैं जाति का बन्धन फिर कैसा।
जगत सिरमौर भारत को रंगें भगवे के रंग जैसा,
दशानन कंस जैसों के निकालो सीने में गोली।।
प्रीति का रंग भरकर के चलाएं मन की पिचकारी,
प्रकृति का ध्यान रख करके सजाएं सुन्दर फुलवारी।
देवू की तमन्ना है, कर जोड़ करूं विनती,
विदेशी वस्तु सामानों की जला दो घर घर में होली।।
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सादर नमस्कार
ReplyDeleteआपको होली की हार्दिक और अनंत शुभकामनाएं रंगों का यह पर्व आपके जीवन में रंग बिरंगी खुशियां लेकर आए ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूं 🙏🙏
आपका
देवेन्द्र कुमार
आपको भी हादिक शुभकामनाएं होली की सर
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